भक्तो को बचाने वाली माँ दुर्गा की पढ़े नवरात्री की कहानी

Education Help October 16th, 2020 10:34
credit: third party image referenceएक नदी के किनारे छोटासा गाँव बसा था।उस गाँव के लोग नदी से पाणी लेकर खेती करते थे।गाँव के लोग अपने खेत में खेती करके अपनी और अपने परिवार की जरुरत को पूरा करते थे और खुसहाली के साथ जीवन जीते थे।गाँव के लोगो की माँ दुर्गा पर बोहत श्रद्धा थी इस कारण वे सभी गाँव वाले माँ दुर्गा की सुबह श्याम पूजा करते थे।नवरात्री पर सभी गाँव वाले गाँव में भव्य कार्यक्रम का आयोजन करते थे और सभी मिलजुलकर उसमे सहयोग करते थे।सभी गाँव वाले नवरात्री का त्यौहार साल का सबसे बड़ा त्यौहार करके मनाते थे।साल भर गाँव वाले माँ दुर्गा की सेवा करते थे पर जब नवरात्री का त्यौहार आता था तब वे अपने पुरे तन मन से माँ दुर्गा की सेवा करते थे।नवरात्री में वे सभी मिलकर विभिन्न तरह के खेल भी खेलते थे और अपनी एकजुटता कायम रखते थे।गाँव के लोगो का ये प्यार देखकर माँ दुर्गा भी उनपर हमेशा प्रसन्न रहती थी।पर एक दिन उस गाँव पर एक राक्षस की नजर पड़ी,उसे गाँव की खुसिया उससे देखी नहीं गयी इस कारण वह नदी का पाणी रोकने लगा।पाणी रोकने के साथ-साथ अब वह राक्षस गाँव में भी इधर-उधर भटकने लगा और लोगो को मारने लगा।लोग अब उस राक्षस से और खेत की तरफ जाने से भी डरने लगे।अगले साल फिर से नवरात्री का त्यौहार आने वाला था,इस कारण वे अब माँ दुर्गा से प्रार्थना करने लगे की उनकी समश्या दूर करने जरूर माँ दुर्गा आयेंगी।तब माँ दुर्गा अपने भक्तो को समश्या में देख जाग उठी और उस राक्षस का वध करने गाँव में आयी।अपने गाँव में माँ दुर्गा को प्रसन्न होते देख सभी गाँव वाले बोहत खुस हुये और माता से अपने दुःख हरन की प्रार्थना करने लगे।राक्षस माँ दुर्गा को देखकर उसे मारने दौड़ा तब माँ दुर्गा ने उसे अपने त्रिशूल से मार दिया और गाँव की समश्या की हल कर दिया।उसके बाद सभी गाँव वाले अपनी खेती में नदी का पाणी लाने लगे और खेती करने लगे।माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिलने के कारण अब सभी गाँव वाले फिर से नवरात्री का त्यौहार जोर सोर से मनाने लगे।

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